स्कूल की आखिरी घंटी खाली गलियारों में गूंजती है, और चोटी वाली यह मोहक लड़की होमवर्क छोड़कर एक बेहद संतोषजनक पाठ्येतर गतिविधि में लग जाती है। उसके पड़ोसी का रसोईघर उसकी कामुक ज्ञान की कक्षा बन जाता है, जहाँ वह ऐसी बातें सीखती है जो किसी पाठ्यपुस्तक में नहीं सिखाई जातीं। अपनी चेकदार स्कर्ट उतारकर और पैंटी फेंककर, वह ठंडे संगमरमर के काउंटरटॉप पर टिक जाती है और वयस्क प्रवेश के तीव्र आनंद का अनुभव करती है। उसके पहले कभी न छुए हुए अंग उस धड़कते हुए आक्रमण को सहने के लिए खिंच जाते हैं जो उसके विकसित होते शरीर में सिहरन पैदा कर देता है। हर ज़ोरदार धक्के से उसके कसे हुए दांतों से दबी हुई सिसकियाँ निकलती हैं और उसके उभरे हुए स्तन लयबद्ध रूप से हिलते हैं। भोली-भाली छात्रा से अतृप्त कामुक स्त्री में उसका परिवर्तन तब पूरा होता है जब वह अंततः अनियंत्रित कामोत्तेजक झटकों की लहरों के आगे आत्मसमर्पण कर देती है।