उष्णकटिबंधीय स्वर्ग एक वर्जित इच्छाओं के खेल के मैदान में बदल जाता है, जब एक खूबसूरत एशियाई सुंदरी अपनी शादी की कसमों को तोड़कर एक रात आदिम आनंद में डूब जाती है। उसकी बादाम जैसी आंखें शरारत से चमक उठती हैं, जबकि उसकी कोमल उंगलियां अपने प्रेमी की मांसल छाती पर आकृतियां बनाती हैं। समुद्र की हवा उसकी आनंद भरी आहों को अपने साथ ले जाती है, क्योंकि उसे ऐसे सुख का अनुभव होता है जो उसका पति कभी नहीं दे सका। उसका आकर्षक शरीर हर ज़ोरदार धक्के के साथ झुकता और कांपता है, मदहोश कर देने वाले जुनून में पूरी तरह से डूब जाता है। पकड़े जाने का डर हर अनुभूति को तीव्र कर देता है, जिससे यह अविस्मरणीय मिलन एक ऐसा विश्वासघात बन जाता है जो उसकी बेहिसाब, अनियंत्रित यौन संतुष्टि की गहरी लालसा को जगा देता है।